बदायूं, अप्रैल 9 -- तहसील क्षेत्र के रिसौली में आयोजित श्रीरामकथा के चौथे दिन कथावाचक रवि समदर्शी महाराज ने काम, क्रोध, लोभ और अहंकार को जीवन का सबसे बड़ा शत्रु बताया। उन्होंने कहा कि इनमें से एक भी अवगुण मन में आने पर अन्य स्वतः आ जाते हैं, जिससे जीवन विचलित हो जाता है। इनसे बचने का एकमात्र मार्ग प्रभु का सुमिरन और सत्संग है। महाराज ने नारद मोह, विश्वमोहिनी स्वयंवर और रावण जन्म के प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कैसे अहंकार के कारण नारद जी भी माया के वशीभूत हो गए थे। इस अवसर पर यजमान राधेश्याम पाली, सोनू शर्मा, विपिन सिंह, सतीश कश्यप, धर्मेंद्र माहेश्वरी, भानू चौहान, अवधेश, योगेश, डॉ. वीरेश, श्रीकृष्ण राणा, संजीव, बुधपाल, राजेश पाली, राजेश सिंह, अतुल, राजू, रिंकू, दुष्यंत, मुनेंद्र, पंकज, राजेंद्र, पुनेश, शिवम, मंगलीराम, दुष्यंत शर्मा, उत्पल औ...