नई दिल्ली, सितम्बर 9 -- जन्माष्टमी के बाद बाल गोपाल की छठी का उत्सव मनाया जाता है। जिस तरह घर में बच्चे के जन्म के छह दिन बाद छठी मनाने की परंपरा है, उसी तरह भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की भी छठी मनाई जाती है। इस दिन लड्डू गोपाल को घर के बच्चे की तरह सजाया जाता है और उनके लिए खास पकवान बनाए जाते हैं। कई घरों में छठी के मौके पर महिलाएं मिलकर सोहवर के गीत गाती हैं। इन गीतों में बच्चे के जन्म की खुशी, परिवार का उत्साह और भगवान के प्रति प्रेम का भाव दिखाई देता है। कहीं भजन और कीर्तन होते हैं तो कहीं महिलाएं पारंपरिक गीत गाकर कान्हा के जन्म की खुशी मनाती हैं।छठी पर कान्हा को लगता है खास भोग कान्हा जी की छठी पर सबसे खास भोग में कढ़ी-चावल को रखा जाता है। कई परिवारों में इसे छठी के प्रसाद के रूप में बनाया जाता है। इसके साथ माखन-मिश्री, खीर, पेड़ा,...