कान्हा के गीतों से कृष्ण के रास्तों तक, देवऋषि की नई यात्रा मथुरा से द्वारका
रांची, सितम्बर 6 -- जन्माष्टमी के आसपास जहां नए भजन, कीर्तन और कृष्ण गीतों की रौनक बढ़ जाती है, वहीं संगीतकार, दार्शनिक और शोधकर्ता देवऋषि इस बार अपनी कृष्ण यात्रा को संगीत से आगे सांस्कृतिक भूगोल तक ले जा रहे हैं। 'कृष्ण स्तुति' के 15 मिलियन से अधिक व्यूज और हालिया गीत 'कान्हा शरमात है' के बाद अब उनका फोकस उन रास्तों और स्थानों पर है, जहां भारतीय परंपरा श्रीकृष्ण के जीवन की अलग-अलग अवस्थाओं को याद करती है।कृष्ण से जुड़े सांस्कृतिक मार्गों की कर रहे हैं खोज देवऋषि पिछले कुछ समय से श्रीकृष्ण से जुड़े सांस्कृतिक मार्गों पर शोध कर रहे हैं। इस क्रम में मथुरा में जन्म, गोकुल, नंदगांव और वृंदावन के बाल्यकाल, फिर मथुरा वापसी, उज्जैन में गुरु सांदीपनि से जुड़ी परंपरा और आगे द्वारका तक फैली कृष्ण कथा को ग्रंथों, स्थानीय मान्यताओं, मंदिरों और जीवित...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.