कानूनी सहायता सिर्फ रस्म की तरह नहीं होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, मई 23 -- सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी आरोपी को दी जाने वाली कानूनी सहायता सिर्फ एक रस्म या नाममात्र की औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह एक ठोस और सार्थक प्रक्रिया होनी चाहिए जो वकील की प्रभावी सहायता सुनिश्चित करे। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एस.सी. शर्मा की पीठ ने 70 साल के नंदकिशोर मिश्रा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। नंदकिशोर मिश्रा को ट्रायल कोर्ट ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पीठ ने पाया कि आरोपी मध्य प्रदेश के एक सुधार गृह में बंद था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कोर्ट की सहायता करने और आरोपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक 'एमिकस क्यूरी' (कोर्ट का सहायक वकील) नियुक्त किया। यह भी पढ़ें- कानूनी सहायता सिर्फ रस्म की तरह नहीं होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट इसके बाद हाईकोर्ट ने मात्र...
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