पटना, जून 27 -- कानूनी सहायता किसी व्यक्ति पर किया गया उपकार नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। जरूरतमंदों को इसे अधिकार के रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की जरूरत है। ये बातें पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय की senior अधिवक्ता न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश ने कहीं।

कार्यक्रम का विवरण चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू), पटना में शनिवार को आयोजित "जन न्याय संवाद 2026 : हानि की पहचान, न्याय की सुनिश्चितता और गरिमा की रक्षा - लैंगिक आधारित हिंसा व बाल संरक्षण पर बिहार राज्य परामर्श" कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अधिकारों को लेकर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा भी महत्वपूर्ण होती है। 'सहायता' शब्द कई बार अधिकार की भावना को स्पष्ट नहीं करता, जबकि विधिक सहायता को लोगों के अधिकार के तौर पर देखा जाना चाहि...