नई दिल्ली, फरवरी 3 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि ट्रायल कोर्ट के किसी आदेश को कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती देने पर आरोपी को मुकदमे में देरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन और भ्रष्टाचार के दो मामलों में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को अंतरिम जमानत देते हुए की। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देना आरोपी का वैधानिक अधिकार है। ऐसी स्थिति में यदि सुनवाई में देरी होती है, तो इसका दोष आरोपी पर नहीं डाला जा सकता। पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया ...
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