कानपुरी 'बशीर' को बेहद पसंद थी बनारसी बोली
वाराणसी, मई 29 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। बनारस के बेनियाबाग में होने वाले इंडो-पाक मुशायरे की कामयाबी की जमानत माने जाने वाले नायाब शायर डॉ.बशीर बद्र की शायरी ने दुनिया को दीवाना बनाया। कानपुर में पैदा हुए बशीर खुद बनारसी बोली ओर बनारस के घाटों के दीवाने थे। बेनियाबाग में ऑल इंडिया मुशायरे के शुरुआती सालों से उनका बनारस आना शुरू हुआ। यह सिलसिला उस मुशायरा के इंडो-पाक होने के बाद तक चलता रहा। यह भी पढ़ें- स्मृति शेष ::: उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो...बनारस में पहला अनुभव बनारस के छिपीटोला निवासी बुजुर्ग शायर हाफिज रईस बताते हैं कि बेनिया के मुशायरा में बड़े-बड़े शायरों को सुनकर सीखने की गरज से शायरों की खिदमत में लगा रहता था। करीब 60 साल पहले की बात है। बशीर साहब पहली बार आए थे। तब मुझे उनकी खिदमत का मौका मिला था। उन्होंने मुशा...
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