बिहारशरीफ, अप्रैल 13 -- कागज पर चेवाड़ा ओडीएफ घोषित पर अब भी खुले में शौच करने की लाचारी पासी टोला-एकरामा मार्ग पर बिना नाक बंद किए चलना मुश्किल दलित टोलों में बने सामुदायिक शौचालय भी देखरेख के अभाव में खंडहर, चेवाड़ा, निज संवाददाता। स्वच्छ भारत मिशन और लोहिया स्वच्छता अभियान के दावों की चेवाड़ा प्रखंड में हवा निकल गई है। साल 2015 में ही इस प्रखंड को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किया गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रखंड की सात पंचायतों में घर-घर शौचालय बनाने पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन, धरातल की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। आज भी प्रखंड के कई गांवों के लोग खुले में शौच जाने को मजबूर है। नगर पंचायत की सड़कों पर गंदगी: ग्रामीण इलाकों की बात छोड़िए, खुद नगर पंचायत (प्रखंड मुख्यालय) की हालत बदतर है। चेवाड़ा गांव में प्रवेश...