कागजों में पटरियों के किनारे से पेड़ हटाने की योजना
गोरखपुर, मई 31 -- गोरखपुर, मुख्य संवाददाता हर साल रेलवे ट्रैक की जद में आने वाले पेड़ों के काटने-छांटने की योजना तो बनती है लेकिन वह पटरी पर नहीं आ पाती। नतीजा हर साल मानसून में आंधी-तूफान से घंटों ट्रेनों का संचलन प्रभावित हो जाता है। शुक्रवार को आंधी के चलते गोरखपुर-देवरिया रूट पर पेड़ और ओएचई लाइन के ट्रैक पर गिर जाने से 12 घंटे तक रेल संचलन प्रभावित रहा। दो दर्जन से अधिक ट्रेनें घंटों फंसी रहीं जबकि 10 से अधिक को डायवर्ट करना पड़ा। इससे 15 हजार से अधिक यात्रियों को सांसत झेलनी पड़ी।
रेलवे के नियमानुसार पेड़ों की कटाई रेलवे के नियमानुसार ट्रैक के दोनों तरफ 30-30 मीटर तक कोई पेड़ नहीं होना चाहिए। हर साल ऐसे पेड़ों की गिनती होती है और उसे हटाने का प्लान भी बनता है लेकिन मौके पर काम नहीं हो पाता। ऐसे में सांसत यात्रियों को झेलनी पड़ती है...
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