सिद्धार्थ, मार्च 3 -- सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता। जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ बच्चों को काक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के जरिये नई जिंदगी दी जा रही है। इसके साथ ही राष्ट्रीय बधिरता बचाव एवं रोकथाम कार्यक्रम (एनपीपीसीडी) और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के जरिये जिले में इन समस्याओं के संभावित मरीज भी एनपीपीसीडी के तहत चिन्हित किए जा रहे हैं। इन मरीजों में जन्मजात गूंगे व बहरे मरीजों के अलावा दुर्घटना से श्रवण क्षमता खो चुके मरीज भी शामिल हैं। वहीं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग व राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत शून्य से पांच वर्ष तक के जन्मजात इस बीमारी से पीड़ित 15 बच्चों की पिछले तीन सालों में काक्लियर इंप्लांट सर्जरी कराकर उन्हें नई जिंदगी दी गई है। एनसीडी कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आशीष अग्रहरि ने...
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