नई दिल्ली, जून 1 -- उत्तर प्रदेश के वाराणसी की अदालत ने पुलिस कस्टडी (हिरासत) में हुई मौत के 29 साल पुराने एक मामले में बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कानून का उल्लंघन करने वाले दो दारोगाओं के साथ-साथ पुलिसिया बर्बरता पर पर्दा डालने वाले पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को भी दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया है। अदालत ने तत्कालीन सुंदरपुर चौकी प्रभारी (इंचार्ज) को 10 साल के कठोर कारावास और थाने के तत्कालीन एएसआई को छह महीने की सजा सुनाई है। वहीं, खाकी के गुनाह को छुपाने के दोषी पाए गए डॉक्टर को पांच साल की सजा दी गई है। यह वारदात लंका थाना क्षेत्र की सुंदरपुर पुलिस चौकी में हुई थी।100 रुपये की चोरी का आरोप और रात में ही पोस्टमार्टम यह खौफनाक मामला 29 साल पुराना यानी साल 1997 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुंदरपुर पुलिस ने एक ...