हरिद्वार, जुलाई 7 -- पारिजात साहित्यिक मंच की ओर से रविवार शाम शिवालिक नगर में आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने कविता के माध्यम से जीवन, समाज, प्रेम, देश और ईश्वर के प्रति अपनी भावनाएं प्रकट कीं। गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती पूजन और दीप जलाने के साथ हुई। साधुराम पल्लव ने पांव ठहरे हैं, मन सफर में है और चले जब नाव कागज की रचना पेश की। अरुण कुमार पाठक ने लोग बिछुड़े मगर वो मिले भी तो हैं गीत से ईश्वर के प्रति आस्था प्रकट की। कंचन प्रभा गौतम ने अपने गीत मैं फूल-सी खिल जाती हूं तुझे देखकर से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। डॉ. अशोक गिरि ने तीर तरकश में ही अच्छे लगते हैं कहकर संयम और सदाचार की बात कही।
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