कविता भावाभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, समाज को नई दिशा देने वाली विधा
एटा, जुलाई 31 -- साहित्यिक चेतना को समर्पित कार्यक्रम में कविता की वर्तमान समय में प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी एवं काव्य-पाठ हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों ने कविता की सामाजिक भूमिका, मानवीय संवेदनाओं तथा समकालीन संदर्भों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ रजनी वर्मा ने काव्य-पाठ से किया। सोमेश मिश्रा, डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान, अच्युतम केशवम, संजय सिंह, डॉ. ओम ऋषि भारद्वाज, दीप्ति चौहान, दिनेश प्रताप सिंह चौहान, राकेश शम्स, राजेश चंद्र जैन, अभिषेक चौहान तथा अन्य रचनाकारों ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत कर वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। कविता की प्रासंगिकता विषय पर रामचरितमानस, वेद, पुराणों, गीता के उदाहरण से कविता की सामाजिक उपयोगिता, सांस्कृतिक चेतना तथा मानवीय मूल्यों के संरक्षण में उसकी महत्त...
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