लखनऊ, मार्च 30 -- लखनऊ,कार्यालय संवाददाता पुनर्वास विश्वविद्यालय में सोमवार को समकालीन समय, समाज और साहित्यः विमर्श, संवेदना, दिव्यांगता पुनर्वास एवं सामाजिक दायित्व विषयक सम्मेलन और कवि सम्मेलन आयोजित हुआ।कवि पंकज प्रसून ने महंगाई पर तंज कसते हुए पेट्रोल और गैस सिलेंडर को 'खजाना' बताते हुए ऐसी पंक्तियां सुनाईं कि पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। पेट्रोल पंप पर मेरी टंकी जो फुल हुई, ऐसा लगा कि जख्म पुराना हो सिल गया... तिजोरी से भी ज़्यादा, अब हिफ़ाज़त इसकी करनी है, सिलेंडर क्या मिला, जैसे कि ख़ज़ाना हो मिल गया... सुनाकर श्रोताओं को हंसाया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे कवि कालीचरण स्नेही ने ने आ उतरे लै लेखनी,लिखने को जगपी.. और शिखा श्रीवास्तव ने न पूछो प्यास मिट्टी की, जो बरसें प्रेम की बूंदें.. पंक्तियां पढ़ी।अशोक झंझटी ने अजब हालात बनते जा र...
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