कविता और गीत को अलग-अलग देखना अनुचित: मदन कश्यप
मुजफ्फरपुर, अक्टूबर 2 -- मुजफ्फरपुर। दूसरी महादेवी वर्मा के नाम से विख्यात हिन्दी की पहली महिला नवगीतकार डॉ. शांति सुमन की स्मृति में वीसी लेन मिठनपुरा में साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार और कवि मदन कश्यप ने कहा कि कविता और गीत को पृथक विधा मानना हिन्दी साहित्य की सबसे बड़ी भूल है। इस वजह से नवगीत और जनगीत लिखने वालों को उतना महत्व नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए था। मदन कश्यप ने शांति सुमन की पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए कई रोचक और यादगार प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि शांति सुमन ने साहित्य जगत में मुजफ्फरपुर का नाम सुविख्यात किया। राष्ट्रीय मंचों पर उस समय उनकी लोकप्रियता असीम थी। वे जितना अच्छा लिखती थीं, उतना ही अच्छा गाती भी थीं। सतीश कुमार राय ने कहा मुजफ्फरपुर की साहित्यिक शख्सियतों पर एकेडमिक काम होन...
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