कविताओं में झलके जीवन के विविध सोपान
वाराणसी, जून 3 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के अंतर्गत काव्यार्चन की 63वीं कड़ी का मंगलवार को अस्सी घाट पर आयोजन हुआ। नगर के वरिष्ठ गजलकार धर्मेंद्र गुप्त 'साहिल' की अध्यक्षता में हुए सत्र में रचनाकारों ने बचपन से लेकर बुढ़ापे तक के कथानकों को कविता-गीत-गजल और शायरी में पेश किया। उन्होंने सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक एवं सांस्कृतिक विसंगतियों पर भी जमकर प्रहार किए। शायर धर्मेंद्र गुप्त 'साहिल' ने अध्यक्षीय काव्यपाठ की मर्यादा को विस्तार दिया। ग्लोबल वार्मिंग पर केंद्रित गजल 'इस कदर होता न सूरज बेरहम, जो न पड़ते चांद पर अपने कदम...' के बाद पत्रकारिता की चुनौतियों पर भी अपना मंतव्य रखा। यह भी पढ़ें- काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन उन्होंने सुनाया 'झूठ कैसे लिख सकेंगे, बोलिए, है हमारे हाथ में सच की कलम...।' इससे पूर्व सत्र ...
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