कोडरमा, नवम्बर 11 -- कोडरमा, वरीय संवाददाता। कोडरमा की शिव वाटिका रविवार की रात काव्य रस से सराबोर रही। देश के कोने-कोने से आए प्रख्यात कवियों ने नारी शक्ति, संस्कृति, धर्म और समाज जैसे गहन विषयों पर अपने ओजस्वी विचार रखे। मंच पर जब कवि अपनी रचनाएँ सुनाते, तो श्रोता तालियों और वाह-वाह से पूरा सभागार गूंज उठता। साहित्य और संवेदना का यह महाकुंभ देर रात तक चलता रहा। राजनी सिंह अवनी (दिल्ली) ने "कल तक घर के भीतर थी, अब कदम बढ़ाना सीख गई, लाख रुकावटें आईं, फिर भी आगे जाना सीख गई, नारी को कमज़ोर समझना भूल तुम्हारी है, अब वो तो नज़र से भी नज़र मिलाना सीख गई।." कविता के जरिए नारी सशक्तिकरण की धधकती लौ प्रज्वलित की। उन्होंने बताया कि अब स्त्री अबला नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से आगे बढ़ती नारी है। मध्यप्रदेश से आए पं. अशोक नागर ने अपनी हास्य और दर्शन ...
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