लखनऊ, नवम्बर 24 -- लखनऊ, संवाददाता। भागवत जिज्ञासा का विषय है। हम जीवन में हर क्षण जाने-अनजाने में पाप कर्म लादते चले आ रहे हैं। कलयुग में भक्ति ही एकमात्र उपाय है जो इस दुर्लभ मनुष्य जीवन को मंजिल तक पहुंचा सकती है। गोमती तट, बीरबल साहनी मार्ग स्थित श्री श्याम मंदिर में चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथा वाचक किरीट भाई जी महाराज ने कुछ इस तरह से भक्ति के मर्म को समझाया। उन्होंने कहा कि सतयुग में तप साधना कठिन होती थी लेकिन कलियुग में परमात्मा के नाम के स्मरण मात्र से ही पाप नष्ट हो जाते हैं। ईश्वर की पूजा सगुण व निर्गुण सभी रूपों में की जा सकती है। किरीट भाई ने कहा कि कि धर्म का मार्ग सदैव शांति का होता है। अधर्म का क्षणिक प्रभाव तो सुखद हो सकता है, परंतु इसके प्रभाव से कई जन्मों का कष्ट भोगना पड़ता है। भगवान कृ...
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