मोतिहारी, मार्च 1 -- शहर के कलाकरों के लिये कभी राजेन्द्र नगर भवन धरोहर था लेकिन उसकी कुव्यवस्था ने सबको पंगु बना दिया है। वह सिर्फ उपेक्षित इमारत बनकर रहा गया है। नगर भवन में कार्यक्रम करने में परेशानी होती है। साउंड सिस्टम व मंच आधुनिक नहीं है। सभी गुजरे जमाने के हैं। ध्वनि व प्रकाश की व्यवस्था सुसज्जित नहीं है। कार्यक्रम के दौरान आवाज गूंजने लगता है। दर्शकों के कानों तक ध्वनि का मानक रुप नहीं पहुंच कर विकृत रुप पहुंचता है। दर्शक भी उसमें बैठना नहीं चाहते। प्रसाद रत्नेश्वर का कहना है कि नगर भवन के बाथरुम के दीवारों पर पान व गुटखा फेंके रहते हैं। साफ सफाई नहीं की जाती। फर्स टूटे हुए है। बदबू आती है। कार्यक्रम के दौरान कोई कलाकार या दर्शक उसमें जाने से परहेज करते हैं। इस स्थिति में परेशानी होती है। अनिल वर्मा का कहना है कि पहले नगर भवन के...
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