इटावा औरैया, मार्च 31 -- यमुना तलहटी स्थित सिद्धपीठ पड़राये वाले हनुमान मंदिर पर हो रही श्री राम कथा में दूसरे दिवस प्रवचन करते हुए वृन्दावन धाम के रसिक आचार्य नंद किशोर पाण्डेय ने कहा कि राम से भी बड़ा राम का नाम है, और इस कलियुग में हरि नाम चाहे जैसे लिया जाए, उससे व्यक्ति का मंगल ही होता है। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदासजी ने राम चरित मानस में नाम महिमा की कई बार बड़े विस्तार से चर्चा की है, और वे यहां तक लिखते हैं कि "भाव कुभाव अनख आलसहू। नाम जपत मंगल दिसि दशहू"। अर्थात चाहे भाव से लिया जाए या कुभाव से, अथवा अनख्या कर और चाहे आलस्य से ही नाम क्यों न जपा जाए, हर प्रकार से उसका मंगल ही होता है। इसीलिए कहा गया कि "कहों कहां लग नाम बड़ाई। राम न सकहिं नाम गुन गाई"। यानी स्वयं राम भी अपने नाम की महिमा नहीं बता सकते।इसके बाद उन्होंने सती...
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