नई दिल्ली, जुलाई 23 -- राष्ट्र की शक्ति केवल मतगणना से नहीं, करगणना से भी मापी जाती है। विडंबना यह है कि मतदान पर व्यापक विमर्श होता है, पर कर-अनुशासन पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखती, जबकि किसी भी आधुनिक राष्ट्र की स्थिरता का वास्तविक आधार उसकी कर-संस्कृति होती है। 24 जुलाई का आयकर दिवस इसी मौन सत्य का स्मरण कराता है कि राष्ट्र का भविष्य केवल बजट नहीं, बल्कि करोड़ों ईमानदार करदाताओं के निष्ठापूर्ण योगदान से आकार लेता है। इतिहास गवाह है कि समृद्ध राष्ट्रों की नींव केवल संसाधनों पर नहीं, सुदृढ़ कर-संस्कृति पर टिकी होती है। भारत में आधुनिक आयकर व्यवस्था का औपचारिक आरंभ 24 जुलाई, 1860 को सर जेम्स विल्सन द्वारा प्रस्तुत आयकर अधिनियम से हुआ, किंतु स्वतंत्र भारत ने इसे केवल राजस्व-संग्रह नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय विकास का माध्यम बनाय...