मऊ, जून 5 -- मधुबन, हिन्दुस्तान संवाद। तालरतोय में आयोजित तीन दिवसीय आत्मजागरण सत्संग में नवतेश ब्रह्मचारी ने बताया कि अपना कर्म ही वास्तव में सुख का कारण है। यदि हमारे कर्म अच्छे रहेंगे तो सुख उसी से प्राप्त होगा। अच्छे कर्मों का फल ही स्त्री, पुत्र, धनादि के सुख के रूप में होता है। यदि हमारे कर्म अच्छे नहीं हैं तो उक्त वस्तुओं से ही दु:ख प्राप्त होने लगता है, जिन्हें सुख का साधन मानते हैं। प्रवचनमाला के मध्यांतर के बाद ग्राम कनकुडीह गोधना से पधारे नरेन्द्र बह्मचारी ने करमाबाई के जीवन-परिचय से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि करमाबाई की भक्ति के सामने तत्कालीन राजा को भी नतमस्तक होना पड़ा था। यह भी पढ़ें- Quote of The Day: गीता के अनुसार, पैसा नहीं बल्कि ये 3 गुण व्यक्ति को बनाते हैं धनवान आयोजन में ज्ञानानन्द महाराज, नरेन्द्र ब्रह्मचारी, नव...