रामगढ़, फरवरी 11 -- रामगढ़, निज प्रतिनिधि। ब्रज गोपिका सेवा मिशन की ओर से आयोजित 21 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के 12 वें दिन बुधवार को पूज्य स्वामी युगल शरण ने कर्म मार्ग पर विस्तृत व्याख्या करते हुए कर्म और धर्म के वास्तविक स्वरूप को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर यह नहीं समझ पाता कि कौन सा कर्म वंदनीय है और कौन सा निंदनीय, किसे अपनाना चाहिए और किसका त्याग करना चाहिए। स्वामी जी ने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि "सत्यं वद, धर्मं चर, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव" अर्थात सत्य बोलना, धर्म का पालन करना, माता-पिता और गुरु की सेवा करना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने बताया कि श्रुति और स्मृति में वर्णित कर्म-धर्म का पालन प्रत्येक जीव के लिए अनिवार्य है। उन्होंने मुण्डकोपनिषद् का संदर्भ देते हुए कहा कि केवल कर्म करने से मुक्ति स...