बांदा, फरवरी 17 -- बांदा। संवाददाता गिरवां में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन आचार्य राजेंद्र शास्त्री ने विभिन्न प्रसंग सुनाएं। कहा कि मनुष्य अपने स्वभाव और व्यवहार में जितना सुधार कर लेता है वह उतनी ही उन्नति को होता है। स्वभाव और कर्मों की शुचिता ही उन्नति या उत्थान है। इसके विपरीत स्वभाव और कर्मों में दोषों की प्रचुरता ही अवनति या पतन का कारण है। व्यक्ति को कर्म और स्वभाव की शुचिता अवश्य रखनी चाहिए। शुभकर्मों के संयोग से जीव को देवत्व की प्राप्ति होती है। शुभ और अशुभ दोनों के सम्मिश्रण से मनुष्य योनि में जन्म होता है। रासपंचाध्यायी, कंस वध, उद्धव-चरित्र व रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। इस अवसर पर आयोजक अमित कुमार गुप्ता, नैंसी गुप्ता, कुलदीप गुप्ता, गोमती गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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