कर्मयोगी बनने का दिव्य संदेश देती है श्रीमद्भगवद्गीता: डा. उषा
बिजनौर, अप्रैल 24 -- बिजनौर। ब्रह्माकुमारीज़ बिजनौर के तत्वावधान में "जीवन का आधार-गीता" विषय पर काकरान वाटिका में एक भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीके डॉक्टर उषा दीदी ने कर्मों की गूढ़ गति एवं श्रेष्ठ कर्म के आधार विषय पर सारगर्भित प्रवचन दिया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता हमें कर्मयोगी बनने का दिव्य संदेश देती है। गीता में कर्म, अकर्म और विकर्म तीनों के बारे में विस्तार से बताया गया है। उन्होंने समझाया कि मनुष्य को ऐसे श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए, जिससे उसका वर्तमान जीवन भी सुखद और सफल बने तथा आने वाला जन्म भी श्रेष्ठ हो। बीके उषा दीदी ने आगे कहा कि जीवन में देने की भावना अपनानी चाहिए और सभी के प्रति सकारात्मक एवं शुभ भावना रखनी चाहिए। यही सच्चे आध्यात्मिक जीवन की पहचान है। भगवत गीता हमें मानस...
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