प्रयागराज, अगस्त 10 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी का हर निजी कृत्य सेवा कदाचार नहीं माना जा सकता। इसके लिए कर्मचारी के आचरण और रोजगार के बीच वास्तविक एवं निकट संबंध होना जरूरी है। कोर्ट ने इसी आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक कानपुर के कर्मचारी विजय आनंद राय की बर्खास्तगी के मामले में आरबीआई की विशेष अपील खारिज कर दी और एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी और न्की खंडपीठ ने कहा कि महिला मुन्नी राय आरबीआई की कर्मचारी नहीं थीं और न ही वह किसी आधिकारिक काम से कार्यालय आई थीं। दोनों के बीच निजी विवाद था। ऐसे में महिला को थप्पड़ मारने और कार्यालय से बाहर निकालने की घटना को आरबीआई के सेवा नियमों के तहत कदाचार नहीं माना जा सकता। हालांकि, बिना अनुमति कार्यालय छोड़ना नियमों के तहत कद...