अंबेडकर नगर, अगस्त 3 -- अम्बेडकरनगर, संवाददाता। वन विभाग समेत दो दर्जन से अधिक विभागों द्वारा प्रति वर्ष रोपित किए जाने वाले पौधों में 50 प्रतिशत पौधे भी जीवित नहीं रह गए हैं। आंकड़ों गौर करें तो बीते पांच वर्षों में डेढ़ करोड़ से अधिक पौध रोपित किए जाने का दावा तो किए जा रहे हैं किन्तु जमीनी स्तर पर 50 फीसदी रोपित किए गए पौध सुरक्षित नहीं हैं। टांडा के अजमेरी बादशाहपुर की साइट तो महज बानगी भर है जहां पर अबकी बार एक हजार सात सौ पौध लगाने के लिए कागजों में गड्ढों की खुदान तो कर दिया दिया गया किन्तु यहां पर पांच सौ भी पौध अब तक नहीं लग सके हैं। वहीं अन्य विभागों की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।

जंगल क्षेत्र का विवरण जिले में 269 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल जो अभिलेखों में दर्ज है जहां पर छायाकार, शोभाकार, फलदार एवं बेशकीमती पेड़ मौ...