नई दिल्ली, मार्च 3 -- सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने मंगलवार को कहा कि भले ही अलोकप्रिय फैसलों की कीमत किसी जज को अपने प्रमोशन या सेवा विस्तार के रूप में चुकानी पड़े, फिर भी उन्हें अपने पद की शपथ या 'न्यायिक धर्म' का पालन करना चाहिए। केरल हाईकोर्ट में आयोजित जस्टिस टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर स्मारक व्याख्यान के दौरान उन्होंने यह बात कही। उनके भाषण का विषय परिवर्तनकारी संविधानवाद और बुनियादी संरचना सिद्धांत था। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता के लिए यह अनिवार्य है कि जज बिना किसी बाहरी दबाव के अपना काम करें। जस्टिस नागरत्ना ने अपने संबोधन में घटते व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर भी चिंता जताई। कहा कि अक्सर सामूहिक या सार्वजनिक हित के नाम पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता में कटौती की जाती है। इसके प्रति सतर्क रहने की जरूरत ह...
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