रांची, सितम्बर 22 -- प्रकृति और सहजीवन का सशक्त प्रतीक करम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, प्रेम, श्रम और साझी झारखंडी संस्कृति का जीवंत उत्सव है। भादो शुक्ल एकादशी को मनाया जाने वाला यह त्योहार प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता दर्शाती है। अखड़ा में मांदर की थाप और करम गीतों की गूंज भाईचारे व समृद्धि का संदेश देती है। यह पर्व हमें सिखाता है-'प्रकृति है तो जीवन है'। आज के दौर में जंगल, नदी और अखड़ा के अस्तित्व पर गहराते संकट के बीच, करम हमें पर्यावरण संरक्षण की लोक-प्रतिज्ञा की याद दिलाता है। यह भी पढ़ें- Dhanbad News: आज रे करम गोसाईं घारे द्वारे, काइल रे करम गोसाईं कोस नदी पारे.....जीवन-चक्र और उर्वरता का दर्शन - डॉ. बीरेंद्र कुमार महतो, असिस्टेंट प्रोफेसर, रांची यूनिवर्सिटी यह भी पढ़ें- गांडेय में आज मनाया जाएगा कर्मा करम पर्व में 'जाव...