करपात्री महाराज के शैक्षणिक चिंतन की हो रही वापसी
वाराणसी, अगस्त 16 -- वाराणसी। भारतीय शिक्षा व्यवस्था में स्वामी करपात्री महाराज के शिक्षण चिन्तन को छोड़ लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को स्वीकार करना एक दुःखद पहलू रहा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के उसी गौरवशाली शिक्षण परंपरा को वापस से लौटाने का प्रयास है जिसकी स्थापना करपात्रीजी करना चाहते थे। यह कहना गलत नहीं होगा कि एनईपी 20-20 करपात्री महाराज के शैक्षिणिक चिंतन की वापसी है। इसके मार्गदर्शन में शिक्षक समाज को पहले से अधिक सजग और संवेदनशील होकर काम करना होगा। यह निष्कर्ष है अखिल भारतीय शास्त्र संगोष्ठी सह कुलपति सम्मेलन का। इसका आयोजन करपात्रीजी के 119वें प्राकट्योत्सव के तहत रविवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल के सभागार में हुआ।
सम्मेलन की अध्यक्षता धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी के सानिध्य में हु...
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