झांसी, अगस्त 14 -- झांसी। बुंदेलखंड की शुष्क जलवायु और सीमित सिंचाई संसाधनों को देखते हुए करौंदा की खेती किसानों के लिए बढ़िया विकल्प हो सकती है। भूमि फिर चाहे बंजर हो या कम उपजाऊ सभी के लिए करौंदा की खेती उपयुक्त हो सकती है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अमय काले और डॉ. शौरभ शर्मा ने किसानों को करौंदा की वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी है। यह भी पढ़ें- स्मार्ट खेती से किसान को इनकम और भरोसे का नया आधारकरौंदा की खेती के लाभ वैज्ञानिकों के अनुसार करौंदा कम लागत वाली तथा कम रख-रखाव में तैयार होने वाली बागवानी फसल है, इसकी खेती बंजर, हल्की एवं कम उपजाऊ भूमि में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है।किसानों के लिए उपयोगिता वैज्ञानिकों ने बताया कि करौंदा की खेती विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए उपयोगी है, क्यो...