वाराणसी, सितम्बर 27 -- वाराणसी। एसोसिएशन ऑफ फिजिशयंस ऑफ इंडिया (एपीआई) के उत्तर प्रदेश चैप्टर का 43वां वार्षिक सम्मेलन 'यूपी एपीकॉन -2026' में रविवार को रोहनिया स्थित गोकुलधाम में समापन हुआ। इस मौके पर डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि कम उम्र में होने वाला इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) भविष्य में हृदय संबंधी बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को केवल यौन समस्या मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। नेफ्रोलॉजी सत्र में डॉ. संत पांडे ने प्रोटीन्यूरिया और मधुमेह से होने वाली किडनी की क्षति पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में किडनी की कार्यक्षमता की निगरानी के लिए हर साल ईजीएफआर की जांच जरूरी है। इससे किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट का पता लगाने में मदद मिलती है। डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने सारोग्लिटाजार और इंसुलिन...