रांची, मई 3 -- रांची, वरीय संवाददाता। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़, काम के दबाव और डिजिटल निर्भरता ने इंसान से उसकी स्वाभाविक मुस्कान छीन ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों का कम हंसना केवल व्यवहारिक बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है, जो सीधे हमारे हृदय पर प्रहार कर रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि यदि जीवनशैली में 'हंसी' को दोबारा शामिल नहीं किया गया, तो हृदय रोगों का ग्राफ बढ़ सकता है। यह भी पढ़ें- आपस में तड़का भड़की-तनातनी के बीच लगाए जाते हंसी के ठहाके,गूंज उठता पार्क

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