नई दिल्ली, अक्टूबर 7 -- कम हाजिरी के नाम पर क्या किसी कानून के छात्र को परीक्षा से बाहर किया जा सकता है? देश भर के हजारों लॉ स्टूडेंट्स इसी सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब सबकी नजर अदालत के अगले कदम पर टिकी है। पीटीआई की खबर के मुताबिक जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता के साथ जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सुनवाई की। बेंच के सामने कई अलग अलग याचिकाएं थीं। ये सभी दिल्ली हाईकोर्ट के 3 नवंबर 2025 के फैसले को चुनौती देती हैं। सभी पक्षों को लिखित दलीलें देने के लिए दो हफ्ते का समय मिला है। मामला सिर्फ एक कॉलेज का नहीं है। यह देश के सभी मान्यता प्राप्त लॉ कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने हाजिरी के नियमों पर कई बड़े निर्देश दिए थे। उन्हीं निर्देशों ...