नई दिल्ली, अगस्त 27 -- कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि एक ही मकान में केवल अलग-अलग कमरों में रहना अपने आप में वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता है। अदालत ने यह बात एक पति द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए कही है। फैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर शादी को भंग कर दिया था और पति को अपनी पत्नी को हर महीने भरण-पोषण के लिए 25000 रुपये देने का निर्देश दिया था। आपको बता दें कि दोनों की शादी 11 नवंबर 2001 को हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। जस्टिस डीके सिंह और जस्टिस एच. शांति भूषण की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा, "पति-पत्नी अलग-अलग कमरों में रहते हैं। केवल इसी तर्फ परिस्थिति के आधार पर क्रूरता के निष्कर्ष को सही नहीं ठहराया जा सकता है।"पति-पत्नी के आरोप-प्रत्यारोप पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने उसके साथ शारीरिक, मौखि...