नई दिल्ली, जुलाई 14 -- हिमांशु,एसोशिएट प्रोफेसर, जेएनयू सदी के सबसे बड़े सूखे का सामना कर रहे देश में पिछले हफ्ते हुई बारिश कृषि के लिए वरदान साबित हुई है। पिछले सौ वर्षों में कम बरसात वाला यह पांचवां जून था, जब औसत से 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई। जुलाई में सामान्य से बेहतर बारिश हुई, जिससे 8 जुलाई तक सालाना कमी 17 प्रतिशत रह गई। हालांकि, अनुमान बहुत अच्छे नहीं हैं। मौसम विभाग ने इस साल अधिकतम 94 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान लगाया है। काफी हद तक मौसमी बारिश पर निर्भर कृषि के लिए सिर्फ बारिश की मात्रा ही मायने नहीं रखती, उसका क्षेत्र विस्तार भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि सिंचाई सुविधाएं पूरे देश में असमान हैं। भारत की कृषि योग्य भूमि के केवल आधे हिस्से में ही सिंचाई की सुविधा है, बाकी हिस्सा अब भी बारिश पर निर्भर है। इन इलाकों में कृषि उत्पाद...