नई दिल्ली, अप्रैल 9 -- नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में डीमैट अकाउंट खुलने की रफ्तार में सुस्ती देखने को मिली है। कोविड के बाद के वर्षों में तेजी से बढ़े रिटेल निवेशक आधार के मुकाबले इस साल नए खातों की संख्या में गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट किसी एक कारण से नहीं, बल्कि बाजार की परिस्थितियों, निवेशक व्यवहार में बदलाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के संयुक्त असर का परिणाम है। डिपॉजिटरी एनएसडीएल और सीडीएसएल के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध रूप से करीब 3.2 करोड़ नए डीमैट खाते खुले। देश में डीमैट खातों की संख्या 22.5 करोड़ के पार पहुंच गई। यह वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले करीब 22 फीसदी की गिरावट है। उस अवधि में रिकॉर्ड 4.1 करोड़ नए खाते खुले थे। उस समय बाजार में मजबूत तेजी, बड़ी कंपनियों के आईपीओ और ख...
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