गंगापार, अक्टूबर 4 -- प्रतापपुर विकास खंड के सिंधौरा गांव के एक किसान ने कृषि विभाग के सहयोग से एक बीघे खेत में काकून-कंगनी की बुआई कर पारंपरिक मोटे अनाजों की वापसी की पहल की है। खेत में फसल खड़ी होने के बाद आसपास के ग्रामीणों, बच्चों और युवाओं में इसे देखने और इसके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। नई पीढ़ी के लिए लगभग अनजान हो चुके इस अनाज ने गांव में पुरानी कृषि परंपराओं की याद ताजा कर दी है। काकून ( कंगनी) पारंपरिक मोटा अनाज है। पहले इनका इस्तेमाल स्थानीय खान-पान में बड़े पैमाने पर किया जाता था, लेकिन समय के साथ गेहूं और धान जैसी फसलों का रकबा बढ़ने लगा। बाजार की कमी, प्रसंस्करण की सुविधा न होना और किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण काकून-कंगनी की खेती धीरे-धीरे कम होती गई। अब नलिन कुमार मौर्य ने इसे दोबारा खेत में उतारकर इस...