फतेहपुर, अप्रैल 17 -- कभी घोड़ों की टापों और इतिहास की गूंज से जीवंत रहने वाली दोआबा की धरती आज अपनी ही पहचान के लिए तरस रही है। दोआबा की ऐतिहासिक धरोहरों में बीरबल की ननिहाल, अश्वस्थामा की नगरी, रावण द्वारा स्थापित शिवलिंग, ककईया ईंटों से बना सूर्य मंदिर सहित रानी तालाब आदि दोआबा का मान तो बढ़ा रहा है लेकिन देखरेख के अभाव में यह धरोहरें दिनों दिन उपेक्षा का शिकार होकर जर्जर हालत में पहुंच रही हैं। संरक्षण के अभाव में ये धरोहरें न सिर्फ अपनी चमक खो रही हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास के महत्वपूर्ण पन्ने भी धीरे-धीरे मिटते जा रहे हैं। यह भी पढ़ें- जिले के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का कायाकल्प ऐसे ही कुछ स्थानों की आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' ने पड़ताल की पेश है एक संक्षिप्त रिपोर्ट.....मुगल काल की यादें ताजा करता बीरबल का ननिहालक...
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