किशनगंज, जनवरी 5 -- किशनगंज, एक संवाददाता। कभी किशनगंज शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों की जीवनरेखा मानी जाने वाली रमजान नदी आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। समय था जब इस नदी का पानी खेतों की सिंचाई करता था, पशुपालन का सहारा बनता था और शहरवासियों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करता था। लेकिन बीते करीब तीन दशकों में रमजान नदी का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। आज यह नदी सिकुड़कर कई जगहों पर नाले जैसी दिखने लगी है, जिसका सीधा असर भूजल स्तर, खेती और पर्यावरण पर पड़ रहा है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, लगभग 30 वर्ष पहले तक रमजान नदी में सालभर पर्याप्त पानी रहता था। 75 वर्षीय बजरंग लाल पारीक बताते हैं कि उस समय नदी के पुल का आधा पिलर पानी में डूबा रहता था और बरसात के दिनों में जलस्तर पुल के ऊपरी हिस्से तक पहुंच जाता था। नदी के साफ पानी मे...
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