कबीर की वाणी सामाजिक समरसता की सबसे बड़ी प्रेरणा
बोकारो, जून 30 -- अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कबीर जयंती व सनातन धर्म समरसता विषय पर विचार-सह-काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा संत कबीर का संपूर्ण जीवन और साहित्य सामाजिक समरसता, मानवता, प्रेम व समानता का संदेश देता है, जिसकी आज पहले से अधिक आवश्यकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ करुणा कालिका ने सरस्वती वंदना व अपनी कविता इक-इक बगिया के हम मोती के पाठ से किया। इस अवसर पर ओमान से पधारीं हिंदी की कवयित्री विभा तिवारी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के उपाध्यक्ष दयानंद सिंह व संचालन कवयित्री करुणा कलिका ने की। यह भी पढ़ें- कबीर को सिर्फ पढ़ने की नहीं, गुनने की भी जरूरत : त्रिवेदी दयानंद सिंह ने कहा संत कबीर के विचार आज भी समाज के लिए उतने...
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