लखनऊ, अप्रैल 1 -- बज्म-ए-ख्वातीन की ओर से फरंगी महल चौक में 'एक शाम महिलाओं के नाम' गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें एकता का संदेश दिया गया। बज्म की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत ने कहा कि जंगे-आजादी में कंधे से कंधा मिलाकर हम अपनी मंजिल तक पहुंचे हैं। हमें संविधान ने भिन्न-भिन्न होते हुए भी एक लड़ी में पिरो दिया है। हमारा परचम एक है, एक ही सिक्का है; सारे भारत को एक नजर से देखना कोई नई चीज नहीं है, बल्कि यह हमारी वैदिक परंपरा है। चाहे गैस हो या डीजल, सभी के लिए सुख-दुख एक जैसे हैं। यहां तक कि सबसे बड़ा मसला यानी 'गरीबी' भी एक ही है। हमारी एकता का सबसे बड़ा सबूत हमारे त्योहार और मेले होते हैं, जहां सभी लोग बिना किसी भेदभाव के सम्मिलित होते हैं। उन्होंने कहा कि संगीत की महफिलों में हिंदू-मुसलमान साथ नजर आते हैं और एकता का एहसास कराते हैं; वे जा...
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