कपट का अंत निश्चित होता है : कथा वाचक अंशपूर्णानंद महराज
जौनपुर, मार्च 26 -- जलालपुर, हिन्दुस्तान संवाद। रामलीला मैदान में नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा के सातवें दिन बुधवार की कथा में मानस मर्मज्ञ कथा वाचक अंशपूर्णानंद महराज ने मारीच वध के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। बताया कि कैसे मारीच ने अंत समय में हाय लक्ष्मण पुकार कर अपनी माया रची। प्रभु मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के एक ही बाण से मारीच के तामसी शरीर का अंत हुआ और उसकी आत्मा दिव्य ज्योति में विलीन हो गई। इस प्रसंग से व्यासपीठ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मारीच वध केवल एक राक्षस का अंत नहीं था,बल्कि यह संदेश है कि यदि शत्रु भी भगवान के सम्मुख मृत्यु पाता है, तो उसका कल्याण निश्चित है। उन्होंने कहा कपट का अंत हमेशा निश्चित होता है, चाहे वह स्वर्ण मृग जैसा आकर्षक ही क्यों न हो। व्यासपीठ का पूजन श्रीनारायण अग्रहरि, रानी, प्रिया श्रेयम, र...
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