रांची, अप्रैल 2 -- रांची, वरीय संवाददाता। राजधानी में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को गर्भ कल्याणक का उत्तर रूप श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में आत्मिक उत्थान और सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक उत्थान बाहरी चकाचौंध से नहीं, बल्कि भीतर के सम्यक् दर्शन से होता है। जब मनुष्य की दृष्टि बदलती है, तभी उसका चरित्र और व्यवहार भी रूपांतरित होता है। मुनिश्री ने कन्या भ्रूण हत्या जैसे कुकृत्य पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे आधुनिक समाज का सबसे बड़ा पाप करार दिया। उन्होंने कहा कि कन्या केवल एक शरीर नहीं, बल्कि संस्कार और संस्कृति की संवाहक है। जिस समाज में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, वह कभी समृद्ध नहीं हो सकता। गर्भ में ही निर्द...