पाकुड़, जनवरी 4 -- पाकुड़। शहर के अग्रसेन भवन में चल रहे मारवाड़ी समाज के द्वारा नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान शाकंभरी देवी भागवत कथा कन्या पूजन के साथ संपन्न हो गया। कथा वाचिका पूज्य मानस बिंदु ने बताया कि अपने शरीर से शाक यानि वनस्पति उत्पन्न किए, जिससे लोगों की भूख शांत हुई और वे शाकंभरी कहलाई। वर्ष भर में चार नवरात्रि मानी गई है, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में शारदीय नवरात्रि, चैत्र शुक्ल पक्ष में आने वाली चैत्र नवरात्रि, तृतीय और चतुर्थ नवरात्रि माघ और आषाढ़ माह में मनाई जाती है। परंतु तंत्र-मंत्र के साधकों को अपनी सिद्धि के लिए खास माने जाने वाली शाकंभरी नवरात्रि का आरंभ पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होता है, जो पौष पूर्णिमा पर समाप्त होता है। कहा कि मां शाकम्भरी कमल में निवास करने वाली हैं और हाथों में बाण, शाकसमूह तथा प्रकाशमान धनु...