मेरठ, अप्रैल 13 -- जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम के प्रांगण में रविवार को वेदांत सत्संग समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह में कथाव्यास महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती ने भागवत महापुराण पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि साधक का निरंतर प्रयास भगवान को तत्व रूप में जानने के लिए होना चाहिए। जगत में जहां भी किसी वस्तु की सत्ता है, वही कृष्ण हैं और उसकी प्रकृति राधा स्वरूप है। भागवत पुराण का मूल प्रतिपाद्य भगवान श्रीकृष्ण हैं। बताया कि नैमिषारण्य में सूत ने शौनक आदि ऋषियों को हरिद्वार में सनतकुमार ने नारद को और शुकतीर्थ में शुकदेव ने महाराज परीक्षित को कथा सुनाई थी। कथा का श्रवण और कथन दोनों ही श्रेष्ठ सत्कर्म हैं। कहा कि कुसंग सबसे बड़ा दोष है और दूसरों के दोषों की निंदा करना सबसे बड़ा पाप। भगवद प्राप्ति और आत्मज्ञान, ...
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