कथा में कृष्ण-बलराम का मथुरा आगमन, कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग का हुआ वर्णन
हाथरस, मई 24 -- हाथरस। परित्राणाम साधूनां विनाशाय च दुष्कृतम्' अर्थात साधुओं को बचाने और दुष्टों के संहार के लिए मैं आता हूँ। यह उद्गार श्री हरि सुरेशाचार्य महाराज ने व्यासपीठ से रुई की मण्डी स्थित ठा. कन्हैयालाल जी महाराज में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन व्यक्त किये। इसके अलावा श्रीमद् भागवत सप्ताह के छठे दिन कथा व्यास श्री हरि सुरेशाचार्य जी महाराज ने कथा में बलराम श्री कृष्ण का मथुरा आगमन, कंस वध, रुक्मणी-कृष्ण विवाह, एवं रण छोड़ प्रसंग का वर्णन किया। कथा में ब्लॉक प्रमुख मुरसान रामेश्वर उपाध्याय व डॉक्टर विकास शर्मा ने व्यासपीठ जी का माला व पटका पहनाकर स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर मंदिर कमेटी ने सभी को ठाकुर कन्हैया लाल का छवि चित्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर अध्यक्ष राजकुमार कोठी...
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