बांदा, अप्रैल 7 -- बबेरू l ग्राम बिसंडी में अनिल प्रताप सिंह के यहां श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन आचार्य अभिषेक शुक्ल जी ने कहा कि कथाश्रवण का वास्तविक लाभ तब है जब उसे आचरण में स्वीकार किया जाए। यदि कथा सुनने के बाद क्रोध,लोभ और द्वेष में कमींं नहीं आती,तो वह केवल एक बौद्धिक व्यायाम बनकर रह जाती है। मनुष्य अपने स्वभाव और व्यवहार में जितना सुधार कर लेता है वह उतना ही उन्नत होता है। स्वभाव और कर्मों की शुचिता ही उन्नति या उत्थान है तथा इसके विपरीत स्वभाव और कर्मों में दोषों की प्रचुरता ही अवनति या पतन का कारण है। व्यक्ति को कर्म और स्वभाव की शुचिता अवश्य रखनी चाहिए। ध्रुव जी ने नारद जी के उपदेश को स्वीकार करके भगवद्भक्ति की और उनका परममंगल हुआ। इस अवसर पर रणवीर सिंह,सन्तोष मिश्रा,अरुण सिंह,विमल जी आदि श्रद्धाल...