गंगापार, मार्च 9 -- तीन दशक पूर्व जिस मेजा की पठारी भूमि पर यूपी स्टेट यार्न कम्पनी रात के समय जगमागती थी, कताई मिल की मशीनों की गड़गड़हट से मेजा का पठारी इलाका गुलजार रहता था, कताई मिल के पास स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रोजगार मिला था, लोग खुश थे। अब ऐसा नहीं रह गया है। करोड़ों की मशीनें नीलाम हो गई, यही नहीं लाखों का भवन पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया, एक-एक ईंट बिक गई। कताई मिल का ध्वस्तीकरण हो जाने के बाद मिल के एक गेट पर वन विभाग उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना नाम लिखा दिया है। आवश्यक सूचना में दर्शाया गया है कि उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में भूमि आरक्षित वन विभाग घोषित है। जिस जमीन पर कताई मिल मेजा का संचालन होता रहा, उस जमीन पर वन विभाग का भी हिस्सा है। जिसके बंटवारे के लिए कई बार एसडीएम मेजा कार्यालय में बैठक हो चुकी है, लेकिन ...
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