नई दिल्ली, मार्च 5 -- 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के हमलों में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान नेतृत्व संकट से गुजर रहा है। इस कठिन समय में आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी का नाम सबसे प्रमुखता से उभरा है। कट्टरपंथी विचारधारा के समर्थक अराफी अब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई के साथ मिलकर उस परिषद का हिस्सा हैं, जिसे नए सर्वोच्च नेता के चयन और युद्ध की स्थिति से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 60 वर्षीय अराफी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही उतने चर्चित न हों, लेकिन ईरान के भीतर उन्हें खामेनेई के सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों में गिना जाता है। 1959 में जन्मे अराफी की पूरी परवरिश और करियर खामेनेई की छत्रछाया में फला-फूला है। वे खामेनेई के उस दृष्टिकोण के प्रबल समर्थक हैं कि शासन पूरी तरह से शिया इस्लामी न्...
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